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धरती के भीतर छिपा एक नया ‘द्रव्य अवस्था’ मिला – वैज्ञानिकों ने खोजा सुपरआयोनिक कोर

अनुसंधान के अनुसार, पृथ्वी का सबसे भीतरी कोर न ठोस है, न तरल – बल्कि एक ‘सुपरआयोनिक अवस्था’ में मौजूद

PNS Bureau,12 Nov,2025:- वैज्ञानिक रिपोर्ट | ग्लोबल साइंस डेस्क

वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के गहरे कोर में छिपा एक नया ‘द्रव्य अवस्था’ खोज निकाला है, जो हमारी पृथ्वी के
सबसे रहस्यमय गुणों को समझाने में मदद कर सकता है।
नए अध्ययन में पता चला है कि पृथ्वी का भीतरी कोर पारंपरिक ठोस नहीं, बल्कि एक ‘सुपरआयोनिक स्टेट’ में है।

इस अजीब अवस्था में कार्बन परमाणु तरल की तरह बहते हैं, जबकि लोहे की क्रिस्टल संरचना ठोस बनी रहती है।
इससे पृथ्वी का कोर ठोस की तरह घना भी रहता है और पिघले धातु की तरह लचीला भी।

क्या है सुपरआयोनिक अवस्था?

चीनी शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अवस्था पृथ्वी के कोर के उस अजीब व्यवहार को समझाती है,
जिसने वैज्ञानिकों को वर्षों से उलझा रखा था।
कार्बन जैसे हल्के तत्वों का यह तरल जैसा बहाव पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सह-लेखक डॉ. युकियान हुआंग के अनुसार,
“भीतरी कोर में परमाणुओं का प्रवाह जियोडायनमो के लिए एक ऊर्जा स्रोत है, जिसे अब तक नजरअंदाज किया गया था।”

धरती का कोर: सूरज की सतह जितना गरम, लाखों गुना दबाव

पृथ्वी के सबसे भीतरी हिस्से में 102 क्विंटिलियन टन वजनी लोहे का गोला है,
जहां तापमान सूर्य की सतह जितना होता है और दबाव 33 लाख गुना वायुमंडलीय दबाव तक पहुंच जाता है।
फिर भी यह कोर कई व्यवहारों में पिघली धातु जैसा दिखता है।

भूकंपीय तरंगें इस कोर से धीमी होकर गुजरती हैं, मानो वे पानी से होकर जा रही हों।
वैज्ञानिक वर्षों से इस पहेली को हल करने की कोशिश कर रहे थे कि कैसे पृथ्वी का कोर एक साथ ठोस और लचीला दोनों हो सकता है।

सुपरआयोनिक अवस्था: ठोस और तरल का मिश्रित व्यवहार

सह-लेखक प्रो. यूजुन झांग बताते हैं—
“इस अवस्था में कार्बन परमाणु बेहद गतिशील हो जाते हैं और लोहे की संरचना के बीच ऐसे घूमते हैं जैसे कोई बच्चा नृत्य मंडली में घूम रहा हो, जबकि लोहा ठोस रहता है।”

कैसे किया गया परीक्षण?

2022 की कंप्यूटर सिमुलेशन ने इस अवस्था की संभावना बताई थी, पर उसका परीक्षण अत्यंत कठिन था।
नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने लोहा–कार्बन मिश्रण पर शक्तिशाली शॉकवेव दागे—
जिसमें धातु को 25,200 किमी/घंटा की गति से धकेला गया और
13.8 लाख वायुमंडल दबाव और 2,300°C तापमान उत्पन्न किया गया।

परिणामों से पता चला कि नमूने कोर जैसी स्थितियों में अत्यधिक लचीले हो गए—जो सुपरआयोनिक अवस्था का संकेत है।

पृथ्वी के विकास और चुंबकीय क्षेत्र को समझने में बड़ी मदद

यह खोज बताती है कि पृथ्वी के अंदर हल्के तत्वों की गति गर्मी को ग्रह के भीतर स्थानांतरित करने और
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भविष्य में दूसरी पृथ्वी-जैसी ग्रहों को समझने में भी मदद मिलेगी

प्रो. झांग के अनुसार—
“इस छिपी हुई अवस्था को समझकर हम पृथ्वी जैसे ग्रहों के आंतरिक रहस्यों को जानने के बेहद करीब पहुंच गए हैं।”


धरती का तरल लोहा कोर कैसे बनाता है चुंबकीय क्षेत्र?

• पृथ्वी के केंद्र में चंद्रमा के दो-तिहाई आकार का अत्यंत गर्म ठोस लोहा कोर है।

• इसके चारों ओर 2,000 किमी मोटी तरल धातु की बाहरी परत है।

• तापमान, दबाव और धातु के संघटन में अंतर के कारण तरल धातु में धाराएँ (convection currents) बनती हैं।

• पृथ्वी के घूमने से उत्पन्न कोरिओलिस बल इन धाराओं को घुमावदार रूप देता है।

• इन तरल धातुओं की गति विद्युत धारा उत्पन्न करती है, जो चुंबकीय क्षेत्र बनाती है।

• यही प्रक्रिया बार-बार दोहराकर एक विशाल चुंबकीय कवच बनाती है— जिसे जियोडायनमो कहा जाता है। (PNS)

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